logo

मदरसा के हिंदू छात्रों को साधारण विद्यालयों में भेजिये, राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग की सिफारिश

madarsa06.jpg

द फॉलोअप नेशनल डेस्क 
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार से कहा है कि मदरसा में पढ़ने वाले हिंदू छात्रों को साधारण विद्यालयों में भेजा जाये। साथ ही आयोग ने इस बात पर भी जोर दिया है कि गैर पंजीकृत मदरसों में पढ़ने वाले मुस्लिम छात्रों को भी साधारण स्कूलों में भेजा जाये। आयोग ने इसके लिए दो कारण बताये हैं। कहा है कि एक तो इस्लामी संस्थान शिक्षा के अधिकार यानी RTE अधिनियम के अंतर्गत नहीं आते हैं। दूसरे मदरसों के अधिकतर शिक्षक पास बीएड की डिग्री नहीं है और उन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा भी पास नहीं की है। कहा कि मदरसों का बुनियादी ढांचा भी आरटीई अधिनियम का अनुसरण नहीं करता है। 

क्या कहा कानूनगो ने 
इस बाबत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने मध्य प्रदेश सरकार से ये आग्रह किया है। कानूनगो ने कहा, "मैं मध्य प्रदेश सरकार से मदरसों में पढ़ने वाले हिंदू बच्चों को बाहर निकालने का अनुरोध करता हूं।" आयोग के प्रमुख बाल अधिकारों के संरक्षण के संबंध में विभिन्न राज्य विभागों के साथ बैठक करने के लिए इन दिनों मध्यप्रदेश में हैं। कानूनगो ने आगे कहा, ‘जिस अधिनियम के तहत एमपी मदरसा बोर्ड अस्तित्व में आया, उसमें मदरसों को परिभाषित किया गया है और साफ तौर से कहा गया है कि उनमें इस्लामी धार्मिक शिक्षा दी जानी चाहिए। शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 1 मदरसों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के दायरे से बाहर रखती है।"  

शिक्षकों के पास न तो बीएड की डिग्री नहीं

एक शैक्षणिक विभाग के साथ बैठक में कानूनगो ने आगे कहा कि कई मदरसों के शिक्षकों के पास न तो बीएड की डिग्री नहीं है और न ही उन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा परीक्षा पास की है। उन्होंने दावा किया कि एनसीपीसीआर के पास इस संबंध में जानकारी संग्रहित की गयी है। उन्होंने आगे कहा, "जो मुस्लिम बच्चे गैर-पंजीकृत मदरसों में पढ़ रहे हैं, उन्हें भी तुरंत सामान्य स्कूलों में भेजा जाना चाहिए।" 


 

Tags - MadrasaRTE Priyank KanungoNCPCR